आट्टुकाल पोंकाला

 दुनियां-भर में सब से ज्यादा महिलायें एकत्र होने के महोत्सव केलिए गिन्नस बुक ऑफ  वेर्ल्ड रिकर्ड्स में दर्ज किया गया स्त्रियों का महोत्सव है आट्टुकाल पोंकाला ।गत वर्ष 35 लाख से ज्यदा स्त्रियोंने हिस्सा लिया था।अब की बार 45 लाख का अनुमान है ।

  केरल में राजधानी नगर तिरुवनंतपुरम में, शहर से लगभग दो-तीन कि.मी.  पर आट्टुकाल देवी का मंदिर है जहां हर साल कुंभ महीने या फाल्गुन  महीने के पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र औरपूर्णमासी के दिन यह पोंकाला महोत्सव मनाया जाता है जिस में स्त्रियों की ही अदाकारी होगी। जहां  स्त्रियों द्वरा पूजा-अर्चना आदि आज भी नहीं होती, वहां, आट्टुकाल में, स्त्रियां ही मिट्टीके बर्तनों में चावल, गुड.  आदि से पूजा सामग्री  पकाकर तैयार करती हैं  और देवी को  चढाकर सायूज्य-लाभ करती हैं। इस महोत्सव के दौरान शहर और आस-पास के 15-20 कि.मी.  पोंकला पकानेवाली भक्तिनों के लाखों चूल्हो  की अग्नि  से एक यगभूमि या यज्ञशाला में बदल जाता है। सडक- किनारे हो,बस-स्टेशन हो,रेल स्टेशन हो, मंदिर-मसजिद-गिरजाघर हो, गली-गली, शहर का पच्चा-पच्चा ,जहां-कहां  भी थोडी जगह हो, औरतें  चूल्हे लगा लेती हैं और जाति,धर्म, देश,भाषा के परे उनका भव्य स्वागत होता है उन्हें सारी सुविधाएं प्रदान की जाती है। और आट्टुकाल  पोंकाला सच्चे अर्थ में सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता का मिसाल बन जाता है।और यही कारण है, आट्टुकाल पोंकाला का, दुनिया में स्त्रियों की जमघट और धर्मनिरपेक्षता की दृष्टि से अपना अनूठा स्थान है ।

पोंकाला (पोंकल) का  मतलब है,प्रभात में धान पकाकर सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करना ।

Iइस उत्सवके पीछे यह कहावी बतायी जाती है, जिसका तमिल महाकाव्य चिलप्पतिकारम के साथ घनिष्ठ संबंध है। कण्णकी के पति कोवलन के ऊपर एक हंसक (पैर का आभूषण) की चोरी का आरोप लगाकर पांड्यराजा ने उनका वध किया। सचमुच कोवलन, गरीबी के कारण,पत्नी कण्णकी के अनुरोध पर,उसके पैरों के  दो हंसकों मेंएक को बेचने केलिए निकले थे। राजाने उसपर हंसक की चोरी का आरोप लगाया और उनका वध  किया ।इस पर नाराज होकर कण्णकी,जिन्हें साक्षात् पार्वती का ही अवतार माना जाता है,शाप देकर कोपाग्नि से मदुरा नगरी को जला दिया और वहां से चेर राज्य की ओर निकल पडी।यहां, आट्टुकाल आने पर,वह कुछ शांत हुई और यहां स्त्रियों ने उन्हें खुश करने केलिए पोंकाला चढाकर शांत किया और आज भी यह प्रथा चलती है ।

     प्रतिवर्ष पोंकाला चढाने केलिए आनेवाली महिलाओं की संख्या उत्तरोत्तर बढती जा रही है।केरल और तमिलनाटु के दूऱ--दूर के इलाकों से स्त्रियां पोंकाला तढाने केलिए आट्टुकाल आया करती हैं।यहां तक कि विदेशों से भी महिलाएं आया करती हैं।सान्फ्रान्सिस्को के कलिफोर्णिया इंस्टिट्यूट ऑफ इ्टग्रल स्टडीज की निदेशक डॉ.डायन इ जानेट गत 18 वर्षों से  पोंकाला चढाती है।आट्टुकाल मंदिर और पोंकाला  पर शोध पर उन्हें कालिफोर्णिया विश्वविद्यलय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त हुई और इस शोधप्रबंध का विमोचन अभी तिरुवनंतपुरम  में स्वास्थ्य मंत्री वी.एस . शिवकुमार ने किया है।

 

 आज सुबह दस बजे मंदिर  के गर्भ गृह के दीप से अग्नि जलाकर मंदिर के भीतर और बाहर के चूल्हों में आग जलाकर, वहां से लाखों-लखों भक्तिनों के चूल्हों में अग्नि जलायी  गयी  और  सारा शहर ही एक  यज्ञभूमि में  बदल गया। इन लाखों चूल्हों में देवी के प्रिय भोज्य पदार्थ- चावल,गुड आदि के मीठे-मीठे पकवान, खीर  आदि तैयार हुए और डेढ बजे  मंदिर  में पूजा के बाद, तदर्थ तैनात करीब 300  पुजारियोंने भक्तिनों के निवेद्यों-पूजाद्रव्यों पर तीर्थ जल

छिडकाकर  पोंकाला को अंजाम  पर पहुंचाया।इसी अवसर पर राजीवगांधी अकादमी फाॅर एवियेशन तकनोलोजी के सेस्ना विमान ने भक्तिनों  पर पुष्पवृष्टि की। पुष्प वर्षा केलिए 100किलो फूलों को इस्तेमाल किया गया। और भक्त गण नैवेद्य चढाकर सायूज्य लाभ कर लौटने लगे।

     इस साल  पूर्व केंन्द्र मंत्री  ए.के .एंटेनी की पत्नी श्रीमती एलिजबथ ने भी पोंकाला चढायी।

उन्होंने कहा कि स्त्री शाक्तिकरण कालिए  उन्होंने पोंकाला चढायी है। केरल के राज्यपाल की पत्नी ने भी पोंकाला चढायी।बहुत-सी फिल्म अभिनेत्रियोंने भी  पोंकाला चढायी है।

    इस वर्ष का पोंकाला महोत्सव प्लस्टिक मुक्त  था। शुशित्व मिशनने इस केलिेए पहल किया

था।सत्ताने भी इसकेे सुचारु  संचालन केलिए अच्छा प्रबंध किय। 3500 से ज्यादा पुलिस कार्मिक।तमिल नाटु से  भी पुलिस सेना का सहयोग । नगर निगम भी सफाई में गिन्नस बुक  कीर्तिमान स्थापित करने के प्रयास में। सफाई कार्यों केलिए 1000 निजी कर्मचारियोंके अलावा तदर्थ 1700 अस्थाई कर्मचारी। लगभग 55 ट्रक। 24  घंटों में सफाई  की पूर्ति का वादा। रेल- सडक परिवहनों का भी बढिया प्रबंध किया गया था।                                              -               

                                           एम.एस.आर।

 

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