maheshडॉ. महेष. एस

संप्रति- एस.एन.कॉलेज, कोल्लम के हिन्दी विभाग में असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर।

केरल विश्वविद्यालय से एम.ए (हिन्दी) प्रथम श्रेणी में  और वहीं से पत्रकारिता तथा अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पहली श्रेणी में उत्तीर्ण। केरल विश्वविद्यालय से 'ए ग्रेड' में हिन्दी एम.फिल। "आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं में सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना" विषय पर केरल विश्वविद्यालय से पीएच.डी की उपाधि।

साहित्याचार्य परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद पन्द्रह सालों तक केरल हिन्दी प्रचार सभा के हिन्दी प्रचारक (1996 से) की हैसियत से तिरुवनन्तपुरम के कवटियार में कार्तिका हिन्दी अकादमी नामक एक हिन्दी विद्यालय चलाया। साथ ही साथ केरल सरकार की सी-डिट एड्यूकेशनल पार्टनर बनकर कंप्यूटर सेन्टर भी चलाया। यहाँ कंप्यूटर प्रशिक्षण, हिन्दी तथा अन्य भाषाओं में डी.टी.पी कार्य आदि चलता रहा। उस समय तिरुवनन्तपुरम के एक-मात्र हिन्दी डी.टी.पी सेन्टर होने के नाते बडे पैमाने पर हिन्दी थीसिसों तथा पुस्तकों का डी.टी.पी कार्य इधर से हुआ।

साहित्य एवं अनुवाद में रुचि रखनेवाले डॉ.महेष.एस ने मलयालम से हिन्दी में अनेक कहानियों का रूपान्तर किया है जिनमें कुछ रचनायें केरलज्योति पत्रिका में प्रकाशित हुई हैं। जिनमें प्रमुख हैं बिल्ली मारने का तरीका, अगस्त्यकूट आदि। हिन्दी में तकनीकी लेखक के रूप में कई आलेख केरल हिन्दी प्रचार सभा, केरल हिन्दी साहित्य अकादमी तथा विविध विश्वविद्यालयों में प्रस्तुत किये हैं। हिन्दी में वेब पत्रकारिता, कंप्यूटर-अनुवाद (CAT तथा MT) और हिन्दी (गणनामूलक भाषा विज्ञान के संदर्भ में), हिन्दी के अध्येताओं का ध्यान गणनामूलक भाषाविज्ञान (COMPUTATIONAL LINGUISTICS) की ओर आदि कई लेख रिसेर्च जर्नलों में प्रकाशित हैं।   UGC  मैनर-प्रोजक्ट के रूप में "हिन्दी अध्ययन-अध्यापन के संदर्भ में गणनामूलक भाषाविज्ञान: एक अध्ययन" विषय पर शोधकार्य ज़ारी है। award

केरल नवोत्थान के पुरोधा परिव्राजक महाप्रभु श्रीनारायणगुरु द्वारा विरचित दैवदशकम का हिन्दी में अनुवाद किया है। प्रस्तुत कार्य केलिए 2014 के चतय (शतभिष नक्ष्त्र) दिन में पांगप्पारा एस.एन.डी.पी द्वारा आयोजित सम्मेलन में केरला देवस्वम मंत्री वी.एस. शिवकुमार द्वारा सम्मानित हुआ। शिवगिरी 83वें तीर्थाटन महामह के अवसर पर,  88वें गुरु महासमाधि दिन में चेम्पष़न्ती पर, श्रीनारायण मन्दिर ट्रस्ट मुंबई तथा विविध एस.एन कॉलेजों में इसका प्रस्तुतीकरण हुआ। गुरुदेव का अनुकंपादशकम् नामक कृति का भी हिन्दी अनुवाद किया है। गुरु महिमा नामक एक गुरुस्तुति की भी रचना की। अब गुरु के अनन्य भक्त बनकर श्रीनारायणगुरु की अन्य कृतियों और उनके बारे में रची पुस्तकों के अध्ययन तथा अनुवाद में लगे हैं।

2011 जनवरी 26 को केरलज्योति पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक स्व. के.जी. बालकृष्ण पिल्लै तथा पूर्व-अध्यक्षा, केरल विश्वविद्यालय, प्रोफ़ेसर डॉ. एस. तंकमणि अम्माजी की अध्यक्षता में  कार्तिका हिन्दी वेब नामक एक यूनिकोड हिन्दी वेब पत्रिका का प्रारंभ किया तथा खुद संपादक रहे।  इसके बाद 2012 में केरल हिन्दी प्रचार सभा के अनुरोध पर उनकेलिए भी एक यूनिकोड हिन्दी वेबसाईट का डिज़ाईन कार्य किया। इस साईट का उद्घाटन मलयालम के महाकवि ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता स्व. प्रोफ. डॉ. ओ.एन.वी कुरुप जी ने किया था। निर्भाग्यवश ये दोनें वेबसईट कुछ सालों बाद बंद हो गये। अब 2015 अक्तूबर 23, विजयदशमी के दिन से प्रोफ.डॉ.एम.एस राधाकृष्ण पिल्लैजी के संपादकत्व में चलनेवाली केरलाञ्चल नामक यूनिकोड हिन्दी वेब पत्रिका के सह-संपादन तथा वेब डिज़ाईन के कार्यों में सहायता प्रदान कर रहे हैं।

                    तिरुवनन्तपुरम में रहते हैं।

 

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केरलाञ्चल

नया कदम , नई पहल ; एक लघु, विनम्र  प्रयास।

 

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हिन्दी भाषा तथा साहित्य केलिए समर्पित एक संपूर्ण हिन्दी वेब पत्रिका

07/03/16 00:24:10 

 

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सहसंपादक की कलम से

 

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संपादकीय

 

'केरलाञ्चल' एक बिलकुल ही नई वेब पत्रिका है ।  हिन्दी के प्रचार प्रसार और प्रयोग के क्षेत्र में बिलकुल ही नयी पत्रिका ।  हिन्दी के प्रचार, प्रसार और प्रयोग के क्षेत्र में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत अखिल भारतीय हिन्दी संस्था संघ, दिल्ली के अधीन ही कई स्वैच्छिक हिन्दी संस्थाएं कार्यरत हैं ।  भारत सरकार की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के लिए अधिनियम बनाये गये है और उसके तहत देश भर में कर्मचारियों और साधारण नागरिकों में भी कार्यसाधक ज्ञान या हिन्दी के प्रति रुचि पैदा करने या बढाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं । हर साल सितंबर  महीने में चौदह तारीख को देश-भर की हिन्दी संस्थओं,  केंद्र सरकारी आगे पढ़ें

 

सूचना प्रौद्योगिकी के इस नये युग में हमारी ओर से एक लघु विनम्र प्रयास 'केरलाञ्चल' नाम से एक वेब पत्रिका के रूप में यहाँ प्रस्तुत है।  आज इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटर में ही नहीं मोबईल फोनों में भी दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर अपनी जान-पहचान की भाषा में खबरें पढ़ सकते हैं।  प्रादुर्भाव के समय वेब पत्रकारिता (सायबर जर्नलिज़म) कुछ अंग्रेज़ी साइटों तक सीमित रहा। लेकिन पिछले पच्चीस-तीस वर्षों के अन्तराल में निकले हिन्दी वेबसाइटों की भरमार देखकर इस क्षेत्र में हुए विकास और लोकप्रियता हम समझ सकते हैं। हिन्दी यूनिकोड का विकास हिन्दी वेब पत्रकारिता का मील पत्थर आगे पढ़ें

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