vd krishnannampiarप्रोफेसर वी.डी कृष्णन नंपियार

आपने काशि हिंदू विश्वविद्यालय वारणासी से हिन्दी साहित्य में एम.ए तथा पी.एच.डी (मानद) की उपाधियाँ प्राप्त की तथा 1963 से 1996 तक केरल के विभिन्न सरकारी काँलेजों में विभिन्न पदों पर हिन्दी की सेवा की और चिट्टूर शासकीय महाविद्यालय से 1996 में प्राचार्य के पद से अवकाश ग्रहण किया ।  उसके बाद 2000 तक श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के तिरूवल्ला केन्द्र में प्राध्यापक रहे ।

लेखन और अनूवाद के क्षेत्र में 45 से ज्यादा पुस्तकों का हिन्दी-मलयालम या मलयालम-हिन्दी अनुवाद उनकी खास साहित्यिक उपलब्धि है । इनमॆ 34 पुस्तकों का हिन्दी से मलयालम में तथा 11 मलयालम पुस्तकों का हिन्दी में आपने अनुवाद किया है । इनमें ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता और मलयालम के प्रतिष्ठित कथाकार एम.टी.वासुदेवन नायर की औपन्यासिक कृति के प्रो.वी.डी.कृष्णन नंपियार का हिन्दी अनुवाद 'वाराणसी' बहुचर्चित रचना है, जो साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित है।

उन्हें कई पुरस्कारों तथा सम्मानों से नवाज़ा गया है जिन में केन्द्र साहित्य अकादमी, केरल साहित्य अकादमी, हिन्दी निदेशालय, दिल्ली, उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, बिहार राजभाषा विभाग, दिल्ली लेखक संघ, केरल बाल साहित्य इन्स्टिट्यूट के पुरस्कार आदि विशेष उल्लेखनीय है । अलावा इनके एम.एन सत्यार्थी पुरस्कार, ई.के. दिवाकरन पोट्टी पुरस्कार, प्रो.कल्लियत्तु दामोदरन पुरस्कार, केरल हिन्दी विद्यापीठ, तिरुवनंतपुरम का पुरस्कार, डॉ. अय्यप्प पणिक्कर अनुवाद पुरस्कार सहित अनुवाद के लिए करीब नब्बे से ज़्यादा पुरस्कारों से उन्हें सम्मानित किया गया है ।

आपने साहित्य अकादमी, भारतीय ज्ञानपीठ, साहित्य प्रवर्तक सहकारी संघ, कोट्टयम, पूर्णा प्रकाशन, कालिकट्ट आदि संस्थाओं के लिए अनुवाद कार्य किये हैं या कर रहे हैं । आप कतिपय सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों से भी जुड़े हुए हैं और उनकी गतिविधियों में सक्रिय भाग लेते हैं जैसे,  विजिलेन्स काऊनसिल तिरूवल्ला के आप पूर्व अध्यक्ष है ।  श्री वल्लभ अन्नदान समिति, श्री वल्लभ मंदिर तिरुवल्ला के पूर्व अध्यक्ष, फिलहाल उसके संरक्षक । अकप्पोरुल साहित्य पत्रिका के संपादक और अकप्पोरुल साहित्यवेदी के कार्यकर्ता हैं ।  आप सरकारी महविद्यालय कोट्टयम का कल्याण समिति के सदस्य भी रहे हैं । 

                     आप तिरुवल्ला, पत्तनमतिट्टा जिला (केरल) के निवासी हैं । 

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केरलाञ्चल

नया कदम , नई पहल ; एक लघु, विनम्र  प्रयास।

 

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हिन्दी भाषा तथा साहित्य केलिए समर्पित एक संपूर्ण हिन्दी वेब पत्रिका

07/03/16 00:24:13 

 

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सहसंपादक की कलम से

 

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संपादकीय

 

'केरलाञ्चल' एक बिलकुल ही नई वेब पत्रिका है ।  हिन्दी के प्रचार प्रसार और प्रयोग के क्षेत्र में बिलकुल ही नयी पत्रिका ।  हिन्दी के प्रचार, प्रसार और प्रयोग के क्षेत्र में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत अखिल भारतीय हिन्दी संस्था संघ, दिल्ली के अधीन ही कई स्वैच्छिक हिन्दी संस्थाएं कार्यरत हैं ।  भारत सरकार की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के लिए अधिनियम बनाये गये है और उसके तहत देश भर में कर्मचारियों और साधारण नागरिकों में भी कार्यसाधक ज्ञान या हिन्दी के प्रति रुचि पैदा करने या बढाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं । हर साल सितंबर  महीने में चौदह तारीख को देश-भर की हिन्दी संस्थओं,  केंद्र सरकारी आगे पढ़ें

 

सूचना प्रौद्योगिकी के इस नये युग में हमारी ओर से एक लघु विनम्र प्रयास 'केरलाञ्चल' नाम से एक वेब पत्रिका के रूप में यहाँ प्रस्तुत है।  आज इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटर में ही नहीं मोबईल फोनों में भी दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर अपनी जान-पहचान की भाषा में खबरें पढ़ सकते हैं।  प्रादुर्भाव के समय वेब पत्रकारिता (सायबर जर्नलिज़म) कुछ अंग्रेज़ी साइटों तक सीमित रहा। लेकिन पिछले पच्चीस-तीस वर्षों के अन्तराल में निकले हिन्दी वेबसाइटों की भरमार देखकर इस क्षेत्र में हुए विकास और लोकप्रियता हम समझ सकते हैं। हिन्दी यूनिकोड का विकास हिन्दी वेब पत्रकारिता का मील पत्थर आगे पढ़ें

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