2016 के गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से सम्मानित श्री पी.गोपिनाथन नायर

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गांधीवादी कर्मपथों में सात दशकों का जीवन समर्पित करनेवाले भारत के सर्वाधिक वरिष्ठ गांधीवादी कार्यकर्ता। सर्वसेवा संघ , सेवाग्राम आश्राम प्रतिष्ठान, अखिल भारत गांधी स्मारक निधि आदि राष्ट्रीय संगठनों के अध्यक्ष -पद पर पहुंचनेवाला केरलवासी और देश द्वारा आदृत वरिष्ठ गांधीवादी- यही हैं श्री पी. गोपिनाथन नायर ।

तिरुवनंतपुरम (केरल) जिले के नेय्याट्टिनकरा में 1922 जुलाई में जन्म ।

इस देश सेवी ने भारत-भर में, मणिपुर से कश्मीर तक, सभी राज्यों में सत्तर वर्षों तक दौरा करके गांधीवादी कार्यक्रमों का जो आयोजन किया है, वह इतिहास में आलेखित हो चुका है ।

भारत में गांधीवादी अभियान को खास नेतृत्व प्रदान करनेवाले अखिल भारत सर्व सेवा संघ , अखिल भारत गांधी स्मारक निधि , अखिल भारत गांधी शान्ति प्रतिष्ठान आदि संगठनों की कार्यकारी समितियों में सदस्य , न्यासी, अध्यक्ष और आजीवन कार्यकर्ता के रूप में आपने सेवा की । भूदान-ग्रामदान की कार्यकारिणि समितियां, अखिल भारत शान्तिसेना समिति , खादी संगठन सब मिलकर सर्वोदय अभियान के रूप में कार्य चला रहे थे । आचार्य विनोबाभावे और श्री जयप्रकाश नारायण ने इन सारे कार्यों का नेतृत्व किया था ।

केरल गांधी स्मारक निधि - सन् 1951 में केलप्पजी की अध्यक्षता में केरल में गांधी स्मारक निधि का गठन हुआ ।  सभी जिलों में इसके केन्द्र कार्य कर रहे हैं ।  शुरू से आप इसमें कार्य कर रहे हैं और संप्रति अध्यक्ष के पद पर इनकी सेवा जारी है ।

सर्व सेवा संघ  के अध्यक्ष पद पर

सर्वोदय क्रान्ति के उन्नायक संगठन सर्वसेवा संघ की कार्य कारिणी समिति में आप शुरू से सदस्य रहे हैं और छ: साल अखिल भारतीय अध्यक्ष के पद पर सेवा की और आज भी संघ की गतिविधियों में सक्रिय भाग लेते हैं ।

सेवाग्राम आश्राम के अध्यक्ष पद पर- भारत में गांधीवादी अभियान में सेवाग्राम का महत्वपूर्ण स्थान है । सर्व सेवा संघ ने 1995 के दौरान श्री पी.गोपिनाथन नायर को एकमत से छह वर्ष के लिए उसके अध्यक्ष  पद पर नियुक्त किया और उसके बाद पांच साल अध्यक्ष पद पर जारी रहा । इस पद पर उनके कार्यकलापों ने अभियान को काफी मजबूत किया ।

संप्रति आप अखिल भारतीय गांधी स्मारक निधि के आदरणीय अध्यक्ष पद पर विराज रहे हैं ।

अखिल भारतीय गांधी शान्ति प्रतिष्ठान-

इसका मुख्यालय दिल्ली में राजघट में हैं । इस महत्वपूर्ण संगठन के शुरू से ही निश्चित किये गये दस आजीवन सदस्यों में आप एक सदस्य हैं । आपने अखिल भारतीय स्तर पर कई संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किये हैं ।

इनमें से प्रमुख आदर्श शान्ति कार्यक्रम -

  1. पंजाब में हिन्द-सिख संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में दो महीने तक अन्य 50 प्रमुख व्यक्तियों के साथ शांति स्थापित की । आप शांति समिति के संयोजक थे ।
  2. बंगलादेश दंगों के दौरान लाखों की तादाद में भारत आये शरणार्थियों के शिबिर में तीन महीने तक प्रशंसनीय सेवा कार्य का  नेतृत्व दिया ।
  3. केरल में कोषिक्कोट के निकट माराट नामक इलाके में छिडे हिन्दू-मुस्लिम दंगों को शांत करने का नेतृत्व किया और शांति स्थापित करने में सफल हुए।
  4. अखिल भारतीय स्तर पर लग-भग बीसों संघर्ष पीड़ित क्षेत्रों में काम करके प्रशंसा के पात्र हुए ।
  5. गांधी शांति प्रतिष्ठान की शांति समिति के स्थाई सदस्य हैं।

गांधीजी के बाद विनोबा भावे ने भूदान आन्दोलन के ज़रिये अभियान को आगे बढ़ाया था । उनकी पदयात्राओं के दौरान तेरहों साल, कई चरणों में उनमें हिस्सा लिया ।

ग्राम दान- केरल में केलप्पजी के सहयोग में बालुश्शेरी क्षेत्र में हुए ग्रामदान के कार्यों में नेतृत्व किया । कोल्लम, तिरुवनंतपुरम जिलों में भूमिहीनों को दानभूमि वितरित करने में विशेष योगदान ।

ब्रह्मा विद्या मंदिर वार्धा के ब्रह्म विद्या मंदिर , जहां विनोबाजी का आश्रम है , में प्रतिवर्ष आयोजित सभी महत्वपूर्ण समारोहों में शामिल होकर समन्वय कार्य संपादित करते हैं। 

जयप्रकाश नारायण

जे पी ने जब सर्वोदय भूमिदान में हिस्सा लेना शुरू किया था , उसी समय सभी कार्य कलापों में उन्होंने बड़ी ज़िम्मेदारी के साथ काम किया ।  संपूर्ण क्रान्ति के रूप में जे पी के सभी सत्याग्रहों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । विनोबाजी के आदेशानुसार उनके 'गीता प्रवचन' शीर्षक ग्रंथ के संदेश के प्रचार के लिए कई जगहों में गीता अध्ययन मण्डलों की स्थापना की ।  अपने जन्मदेश में गत 44 वर्षों से एक आर्ष संस्कृति मंच के तत्वावधान में पचासों अध्येताओं के लिए गीता की कक्षाएँ चला रहे हैं ।

बजाज पुरस्कार

गाँधीवादी कार्य क्षेत्र में राष्ट्र स्तर पर महान सेवा केलिए प्रदत्त जमनालाल बजाज पुरस्कार से 2003 में उन्हें नवाज़ा गया है । अलावा इसके सैकड़ों पुरस्कार उन्हें प्राप्त हुए हैं । 

सर्वोदय सम्मेलन पच्चीसों अखिल भारतीय सर्वोदय सम्मेलनों के सफलता पूर्वक आयोजन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका आदा की ।

शान्ति निकेतन में उनके जीवन में शांति निकेतन के अध्ययन का बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है ।  1946-48 के दौरान एक शोधार्थी के तौर पर विश्व भारती विश्वविद्यालय के चीनभवन में  आप भर्ती हुए थे । लेकिन तब तक भारत आज़ाद हुआ था और भारत विभाजन और तत्पश्चात बंगाल में छिड गये हिन्दू-मुस्लीम दंगों के कारण वे वहाँ अपना अध्ययन पूरा नहीं कर सके थे ।

 महत्वपूर्ण घड़ियाँ कोलकत्ता में हिंदू मुस्लीं दंगों को शांत करने के लिए गाँधीजी का उपवास और दंगों का शांत होना, भरत की आज़ादी की लडाई में महत्वपूर्ण घड़ियाँ हैं । शांतिनिकेतन से नियुक्त शांति सेना के सदस्यों द्वारा कोलकत्ते में शांति स्थापना के प्रयास अमोघ अनुभव है ।तब से गाँधीवादी कार्यकलापों में पूर्ण रूप से जीवन को सौंपने का इरादा । गाँधीजी ,अध्ययन नहीं बल्कि भारत में एकता स्थापित करने के महान कार्य में शामिल होने का आदेश देते हैं । तदनुसार केरल लौट आते हैं ।

स्वतंत्रता संग्राम के सेनानि कॉलेज के अध्ययन के दौरान आप तिरुवनंतपुरम में स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हिस्सा लेते थे और भारत छोडो आंदोलन में हिस्सा लेकर गिरफ्तार भी हुए थे ।

धर्म निरपेक्ष धर्म मैत्री के प्रयास- आज़ादी के बाद केरल में भी श्री पी. गोपिनाथन नायर के सभी कार्यकलाप धर्मांधता से करोडों देशवासियों को मुक्त कर, धर्मनिरपेक्ष मानवता की स्थापना के, मुख्य संदेश से ओतप्रोत हैं ।

          नवति के दौरान भी धर्मनिरपेक्ष साधना में ही आप अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।

 केन्द्रसरकार से पद्मश्री से नवाज़े जाने पर केरल के ही नहीं भारत के भी वरिष्ठ गाँधीवादी श्री पी .गोपिनाथन नायर को केरलाञ्चल तहे दिल से बधाई देती हें और शुभकामनाएँ अर्पित करती हैं ।

पत्नी -श्रीमती एल.सरस्वती अम्मा ।

 

आभार- गांधी स्मारक निधि/ एम.एस.आर ।      

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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