के. सत्यकन पुरस्कृत

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कर्मचारी संगठनों के क्षेत्र में प्रमुख नेता एवं जाने-माने लेखक के. सत्यकन का, मलयालम में रचित `मतनिरपेक्षतयुं मतमौलिकवादवुं' ( धर्मनिरपेक्षता और धार्मिकमौलिकतावाद ) शीर्षक ग्रन्थ, केरल पन्तिरुकूलं आर्ट्स अकादमी द्वारा अयोजित साहित्य प्रतियोगिता  में (विज्ञान विभाग) प्रथम पुरस्कार केलिए चुना गया ।

पुरस्कार में 5000 रुपये की राशि, कीर्तिपत्र एवं शिल्प शामिल है ।  24 दिसंबर 2015 को तृश्शूर साहित्य अकादमी के सभाभवन में, मलयालम विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ.के. जयकुमार की अध्यक्षता में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में विख्यात मलयालम लेखक वैशाखन ने पुरस्कार प्रदान किया ।

विभिन्न धर्मावलंबियों के बीच अविश्वास और स्पर्धा बढ़ाने केलिए धर्म का दुरुपयोग करनेवालों के खिलाफ मज़बूत वैचारिक संघर्ष किये बिना धार्मिकमैत्री या सहयोग असंभव है – यह संदेश देनेवाले `धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक मौलिकतावाद' शीर्षक इस ग्रंथ का लोकार्पण 2015 अप्रैल 28 को तिरुववन्तपुरम प्रेस क्लब में आदरणीय विपक्षी नेता वी.एस. अच्युतानन्दन ने किया था ।  केरल के लोक सेवा आयोग के सदस्य यू. सुरेष कुमार ने प्रथम प्रति ग्रहण की ।

radhakrishn 001के. सत्यकन का जन्म केरल में कोल्लम जिले के किलिकोल्लूर में सन् 1946 में हुआ था ।  कोल्लम एस.एन कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद तिरुवनंन्तपुरम सरकारी विधि –महाविद्यालय से स्नातक उपाधि प्राप्त की ।  1971 में केरल लोकसेवा आयोग में नौकरी शुरू की ।  1973 में लोकसेवा आयोग में कर्मचारी यूनियन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।  दो दशकों तक यूनियन में महासचिव के पद पर काम किया ।  2 वर्ष तक विधान सभा के उपाध्यक्ष सी.ए. कुर्यन के निजी सचिव के पद पर सेवा की ।  2001 में अवकाश ग्रहण किया ।  पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक विषयों पर कई लेख प्रकाशित किये हैं और कई निबंध प्रतियोगिताओं में विजयी हुए हैं ।  राज्य सरकार के कर्मचारियों के अधिकारों केलिए कई संघर्षों में हिस्सा लिया और दो बार जेल भी गये हैं ।  भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करने से कई बार सख्त अनुशासनिक कार्यवाईयों  के शिकार हुए हैं ।  पत्नी सी. आर. सीतामणि अम्माल, पुत्र-मंजित सत्यकन ।

अंजली टी.सी. 211296, पट्टम पोस्ट, तिरुवनंतपुरम 695004, मोबाईल – 093382001848

केरलांचल ब्यूरो

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