ओ. एन. वी कुरुप्पु.....यह भी पढें.......

....... ओ. एन. वी के समान हमेशा अपनी कविता और अपने आपको स्पष्ट करने वाला कोई दूसरा कवि नहीं होगा।  उन्होंने हर कविता में यह व्यक्त करने का प्रयास किया है कि वे जीवन, प्रकृति, प्रेम और इन्सान के गीतकार हैं ।  उन्होंने अपनी कविताओं में फूल-पौधों, चिडियों, जानवरों और तारों का खूब बयान किया । पक्षियों, सस्यजालों – पेडों और पौधों की एक बहुत बडी प्रतीक योजना आपकी कविताओं में व्यापक रूप में पायी जाती है ।  पक्षियों की भांति, कविगण भी उनकी कविताओं में जगह बना लेते हैं ।  उनकी कविताएं सचमुच पूर्व कवियों के साथ आदान-प्रदान से समृद्ध है ।  अपनी कविताओं केलिए ओ.एन.वी ने इन पूर्व सूरियों से प्रभूत मात्रा में प्रेरणा ग्रहण की है ।  मसलन-फेदरिको गार्जिया लोर्क (कविता- मयिलप्पीली), हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय (कविता – ओरु तुल्ली वेलिच्चं ), पाब्लो नेरुदा – (कविताएं – अग्निशलभड्ड़ल, अक्षरं, मृगया, भैरवन्टे तुटी, ञानग्नि), तुञ्चतेषुत्तच्छन (कविता – भूमिक्कोरु चरमगीतं ), बिष्णुदे –    (कविता-शारंगपक्षिकल), निक्कोस कसनदसाकीस (कविता – मृगया) वैलोप्पिल्ली श्रीधर मेनन (कविता -अपराहन, दिनान्त) जीबानन्द दास (कविताएं – वेरुते, क्षणिकं, पक्षे) य्वजनियेवतुषन्को (कविता- ई पुरातना किन्नरं) कालिदास (कविता- स्नेहिच्चु तीरात्तवर) रोबर्ट ब्राऊनिंग, टैगोर (पुनरपि) आदि कविताओं में, नामों के रूप या काव्य  सूचकों के रूप में कई कवि पेश आते हैं और तुञ्चतेषुत्तच्छन (नीला तीरत्तु वीन्डुं, शिलायुगं), मेल्पत्तूर (मेल्पत्तूर वीन्डुं) पून्तानं (नरनायिङने, पष़योरु पाट्ट) उण्णायिवारियर, कुमारनाश्शान (माट्टुविन चट्टंगले) अश्रुवुं ज्वालयुं, चित्रापौर्णमी) वल्लत्तोल (स्मृतिलहरी) पी. कुञ्ञिरामन नायर, वैलोप्पिल्ली, इडाश्शेरी (निला तीरत्तु वीन्डुं) चंङम्पुष़ा चत्त वेरुकल) वाल्मीकी (वन्ध्य मेखंड़ल) पाडुवानल्ला, परभृतंदुखं, कृष्ण पक्षत्तिले पाट्ट) कालिदास (कोडुंकाट्टिनु मुन्पु, वेरुमोरात्मगतं, उज्जयनी) जयदेव (बावुल गायकन) टैगोर (अग्निशलभंगल, काबूलिवाला, नष्टनीडं) ओमर खैयाम (ओमर खैयामिनु सस्नेहं) व्लादिमिर मयकोवस्की (मयकोवस्की चत्त्वरत्तिल) ,येवतुषेन्को (येवतुषेन्कोविनु सस्नेहं) आदि । इन कविताओं के ज़रिये ओ.एन.वी ने कविता और काव्य परंपरा की विस्तृत भूमि पर अपनी कविता को अंकित किया और काव्य निर्माण के एक खास तत्व को हमारे सामने रखा ।अस्तित्व का एक अनजान खंड ही कविता अभिव्यक्त करती है ।  मानवजीवन और प्रपंच  की संभावनाएं-यही ओ.एन.वी की कविताओं ने मलयालम भाषियों को दिया वादा है ।  मानव जीवन की आनजान संभावनाओं की ओर खुली कविता की आंख.... ।

-साभार: पी.के. राजशेखरन, मातृभूमि दैनिक।

 

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