तिरुवनंतपुरम में गुलाम अली की गज़ल सन्ध्या

15 जनवरी को तिरुवनंतपुरम में निशागंधी प्रेक्षागृह में गज़लों का बादशाह गुलाम अली ने गज़लों के आलापन से नगर निवासियों को रोमांचित किया । उन्होंने लगभग एक घंटे तक 'हम तेरे शहर में आये हैं मुसाफिर की तरह', 'दिल में एक लहर सी उठी है', 'चुपके-चुपके रात दिन' आदि गज़लों को भावुकता पूर्ण शैलि में पेश किया तो नगर निवासियों के लिए अपूर्व आनंत का एहसास हुआ । यहां देश, भाषा, जाति, धर्म सब की सीमारेखाएं समाप्त हुई और एक ही चीज़ बच गयी, बस संगीत ही संगीत । सभी प्रकार की असहिष्णुताएं, रोक, बन्द,विरोध सब संगीत में घुल गये । ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेयता मलयालम के प्रिय कवि श्री.ओ.एन.वी.कुरुप्प ने कहा कि यह भविष्य भारत की ऐतिहासिक घड़ी है । गुलाम अली ने कहा कि यह प्यार कभी भूला नहीं सकता ।
सात प्रमुख व्यक्तियों ने सात वाद्य उपकरण देकर गज़लों के बादशाह का भव्य स्वागत किया । ओ.एन.वी के अलावा तिरुवनंतपुरम के महापौर वी.के.प्रशान्त, अडूर गोपालकृष्णन, मंत्री ए.पी.अनिल कुमार, पूर्व मंत्री एम.ए बेबी आदि सात व्यक्तियों ने मिलकर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घटन किया । पुत्र अमीर गुलाम अली ने तबले पर उनको सहयोग दिया । कभी दोनों मिलकर गाये भी थे ।
स्वर लय और ग्रैंड शोप्पिंग फेस्टिवल निदेशालय ने मिलकर यह कार्यक्रम आयोजित किया था । उन्होंने कार्यक्रम का नाम दिया था – 'सलाम गुलाम अली' ।
बाहर, शिवसेना ने इसका बड़ा विरोध किया था अत: पुलीस की बड़ी सुरक्षा में कार्यक्रम आयोजित किया गया था ।
केरलांचल ब्यूरो ।
गुलाम अली का कोषिक्कोड में भव्य स्वागत

कोषिक्कोड में 17 जनवरी को गुलाम अली ने पुत्र के साथ गज़ल पेश किये । प्रेम, अनुराग, वियोग और ऑसुओं के भाव भीनी गज़ल । यहां भी 'हम तेरे शहर में आये मुसाफिर की तरह', 'दिल में एक लहर सी उठी, कोई ताज़ा हवा चली है अभी, चुपके-चुपके रात-दिन', 'कल चौदहवीं रात' आदि और अंत में 'यह दिल यह पागल दिल मेरा' आलाप कर उन्होंने 'चांदनी रात' नामक इस गज़ल सन्ध्या को कोषिक्कोड नगर निवासियों के लिए एक अपूर्व आनंद का अनुभव प्रदान किया । ज्ञानपीठ विजेयता मलयालम के महान कथा-लेखक एम.टी.वासुदेवन नायर ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन किया था ।
-केरलांचल ब्यूरो.

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